मांझी परगना शासन व्यवस्था | Manjhi Pargana Shasan Vyavastha

Study Jharkhand PSC, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों एवं पाठकों के लिए झारखण्ड का इतिहास के अंतर्गत मांझी परगना शासन व्यवस्था | Manjhi Pargana Shasan Vyavastha से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें प्रस्तुत कर रहा है। यह आपको JPSC, JSSC एंव अन्य झारखण्ड राज्य आधारित परिक्षाओं मे सहायता करेंगी।

मांझी परगना शासन व्यवस्था | Manjhi Pargana Shasan Vyavastha

मांझी परगना शासन व्यवस्था || Manjhi Pargana Shasan Vyavastha under History of Jharkhand for JPSC, JSSC and other exams

मांझी परगना शासन व्यवस्था संथाल जनजाति कि पारम्परिक स्व शासन व्यवस्था है। यह व्यवस्था चार स्तर पर कार्य करती है।

    1. ग्राम
    2. देश या मोड़े
    3. परगना
    4. दिशुम परगना

1. ग्राम स्तर

हर गाँव के संचालन के लिए एक पारम्परिक स्व शासन व्यवस्था है और इस व्यवस्था मे निम्नलिखित महत्वपूर्ण व्यक्ति होते है जो जनजाति व्यवस्था के अनुसार अपने कार्यों का संपादन करते हैं।

    1. मांझी
    2. जोग मांझी
    3. प्रमाणिक
    4. जोग प्रमाणिक
    5. गुड़ैत / गोड़ाईत
    6. भग्दो प्रजा
    7. नायके
    8. कुड़ाम नायके
    9. लासेर टैंगोय
    10. चौकीदार

1. मांझी

यह गाँव का प्रधान होता है। न्यायिक एंव प्रशासनिक अधिकार मिले होते है जिसका उपयोग करके किसी भी तरह के विवादों या समस्याओं का निवारण करते थे। बाहरी मामलों में यह गाँव का प्रतिनिधित्व करते है। इनका चुनाव सामान्यतः माघ के महिने मे किया जाता था।

2. जोग मांझी

यह मांझी का सहायक एंव उप सचिव होता है। गाँव के युवा लड़के लड़कियों का नेतृत्व करता है। जन्म और शादी विवाह कि जानकारी रखता है एंव इससे जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए अपनी सलाह देता है और निर्णय भी सुनाता है। गाँव के लोगो के आचरण पर पैनी निगाह रखता है। यौन अत्याचार, बलात्कार, अवैध संतान जैसे मामलों मे पीड़ित व्यक्ति सबसे पहले जोग मांझी को ही सूचना देता है।

3. प्रमाणिक

यह मांझी की अनुपस्थिति मे यह उनके सारे कार्य करता है। इन्हें उप मांझी भी कहा जाता है। अपराधी को क्या दण्ड दिया जाये यह प्रमाणिक ही निश्चित करता है।

4. जोग प्रमाणिक

यह जोग मांझी की अनुपस्थिति मे यह उनके सारे कार्य करता है। इनहे उप जोग मांझी भी कहा जाता है।

5. गुड़ैत / गोड़ाईत

यह मांझी के सचिव एंव संदेशवाहक के रूप मे कार्य करता है और उनके निर्देश को ग्रामीणों तक पाहुँचाता है। कोई भी बैठक, समारोह, उत्सव, पर्व त्योहार या अन्य अवसर पर ग्रामीणों को सूचित करता है और उनहे एकत्रित करता है। गाँव के हर परिवार एंव उनकी जनसंख्या कि पूरी जानकारी रखता है और यह जानकारी मांझी के साथ साझा करता है।

6. भग्दो प्रजा

गाँव के किसी भी मामले मे विचार विमर्श के लिए कुछ वरिष्ठ और प्रमुख व्यक्तियों को शामिल किया जाता है जिनहें भग्दो प्रजा कहा जाता है।

7. नायके

यह गाँव का धार्मिक प्रधान होता है जो धार्मिक अनुष्ठान तथा समारोह के संपादन के लिए उत्तरदायी होता है। धार्मिक अपराधों पर फैसला नायके द्वारा ही दिया जाता है।

8. कुड़ाम नायके

यह नायके का सहयोगी होता है और उनकी अनुपस्थिति मे कार्य करता है। गाँव के बाहर जंगल तथा पहाड़ियों के देवी देवताओं का अनुष्ठान करता है।

9. लासेर टैंगोय

बाहरी आक्रमण से यह गाँव कि रक्षा करता है और एक प्रहरी के रूप मे कार्य करता है।

10. चौकीदार

यह मांझी के आदेशानुसार दोषी व्यक्ति को खोजता है और बंधक बना कर मांझी के समक्ष पेश करता है। यह पद पारम्परिक पद नही है।

2. देश या मोड़े

यह पाँच से आठ गाँव का संगठन होता है जिसका प्रमुख देश मांझी या मोड़े मांझी कहलाता है। यह संगठन ग्राम स्तर की व्यवस्था से उपर कार्य करता है।

3. परगना

यह पंद्रह से बीस गाँव का संगठन होता है। इसके प्रमुख को परगनैत कहते हैदेश मांझी या मोड़े मांझी इनके सहयाक होते है जो एक से अधिक हो सकते है। परगना मे शामिल सभी गाँव के मांझी इसके सदस्य होते है। यह संगठन देश या मोड़े स्तर की व्यवस्था से उपर कार्य करता है।

4. दिशुम परगना

यह सत्तर या अस्सी गांव का संगठन होता है। इसके प्रमुख को दिशुम परगनैत कहते है। यह संगठन कुछ ही क्षेत्रों मे पायी जाती है एंव परगना स्तर की व्यवस्था से उपर कार्य करता है।

विवादों को निपटाने कि प्रक्रिया

मांझी परगना शासन व्यवस्था में विवाद का निवारण पहले ग्राम स्तर पर किया जाता है। पीड़ित व्यक्ति मांझी के समक्ष अपनी समस्या या किसी से विवाद है तो वह रखता है और उसे सुलझाने या न्याय कि फरियाद करता है। मांझी गाँव मे गुड़ैत / गोड़ाईत के द्वारा बैठक बुलवाता है और ग्रामीणों को एकत्रित करने के लिए कहता है। मांझी के नेतृत्व मे विवादित मामले पर हर पक्ष और गवाहों कि बातें सुनी जाती है और बैठकी मे मौजूद सभी पदधारी और भग्दो प्रजा मिलकर इस पर विचार विमर्श करते है एंव उसके निवारण के लिए उचित फैसला मांझी द्वारा सुना दिया जाता है। कुछ समस्याऐं एंव विवाद जो निम्नलिखित है का निवारण इन सभाओं मे होता है।

    1. छोटे मोटे किसी भी प्रकार के विवादों का निपटारा
    2. छोटे मोटे अपराधिक मामले
    3. विकास कार्य या गांव की समस्याओं का निवारण
    4. यौन अत्याचार के मामले
    5. पारिवारिक एंव विवाह सम्बंधित झगड़े
    6. जमीन जायदाद सम्बंधित मामले
    7. धार्मिक पर्व त्योहार सम्बंधित फैसले
    8. परगनैत या दिसुम परगनैत के निर्णय का अनुपालन करवाना 

विवाद के नहीं सुलझने पर या पीड़ित व्यक्ति फैसले से संतुस्ट नहीं होने पर मांझी द्वारा इसे देश मांझी या मोड़े मांझी कि सभा में ले जाया जाता है जहाँ देश मांझी या मोड़े मांझी के नेतृत्व मे उस विवाद को सुलझाने का प्रयास होता है। और अगर विवाद का निपटारा देश मांझी या मोड़े मांझी कि सभा में भी नहीं हो सका तो उसे परगनैत कि सभा मे भेज दिया जाता है जहाँ परगनैत के नेतृत्व मे उस विवाद को सुलझाने का प्रयास होता है। अगर फिर भी विवाद का निपटारा नहीं हो सका तो उसे दिशुम परगनैत की सभा मे भेज दिया जाता है जहाँ दिशुम परगनैत के नेतृत्व मे उस विवाद को सुलझाने का प्रयास होता है।

दो गाँव के बिच अगर कोई विवाद है तो वह ग्राम स्तर से उपर के स्तर पर सुलझाया जाता है।

संथाल जनजाति में सेंदरा वैसी (शिकार परिषद) की भी परम्परा रही है, जिसके प्रधान को दिहरी कहा जाता है। सेंदरा वैसी को संथालों का उच्च न्यायालय भी माना जाता रहा है, जिसके अंतर्गत मांझियों तथा परगनैतों के फैसलों की अपीलें की जाती थी। इसकी बैठक वर्ष में एक बार शिकार के समय आयोजित की जाती थी। 

दण्ड की प्रकृति एंव समाजिक व्यवस्था

अपराधिक मामलें

हत्या जैसे गंभीर अपराध का निपटारा इन व्यवस्थाओं में नहीं होता है। छोटे-मोटे अपराधिक मामलों में आर्थिक दंड देने का प्रावधान है। सबसे हलके दण्ड को करेला दण्ड कहते है जिसमे 1.50 रू तक का दण्ड होता है। गम्भीर मामलों मे भारी आर्थिक दंड लगाया जाता है। अगर दोषी व्यक्ति आर्थिक दंड को पुरा नही कर पा रहा है तो उसको कुछ समय दिया जाता है। सजा मे संशोधन का भी प्रावधान है।

यौन अत्याचार या बलात्कार

ऐसे मामलों मे दोष सिद्ध हो जाने पर आरोपित व्यक्ति को पीड़ित लड़की को पत्नी के रूप मे स्वीकार करने के लिए फैसला दिया जाता है

अवैध संतान

ऐसे मामलों मे कुँवारी लड़की से अवैध संतान के पिता का नाम पुछा जाता है। जब वह किसी लड़के का नाम लेती है और साथ मे गवाहों के द्वारा प्रमाणित हो जाता है कि वह अवैध संतान का पिता है तो आरोपित व्यक्ति को पीड़ित लड़की को पत्नी के रूप मे स्वीकार करने के लिए फैसला दिया जाता है।

अगर किसी कारण वश कुँवारी लड़की अवैध संतान के पिता का नाम नही बता पाती है तो ऐसी स्थिति मे पुरे गाँव को अपवित्र माना जाता है और गाँव को पवित्र करने के लिए लड़की के परिवार वालों से दण्ड स्वरूप पुरे गाँव को भोज कराने का फैसला दिया जाता है। जब अवैध संतान पैदा होती है तो उसका नामकरण जोग मांझी के गोत्र से कर दिया जाता है।

अगर सारी कोशिशों के बाद भी लड़के को नही पकड़ा जा सका तो ऐसे स्थिति मे लड़की के पिता किसी भी लड़के से अपनी बेटी को पत्नी के रूप मे स्वीकार करने का आग्रह करता है और लड़का – लड़की राजी होने पर दोनो कि शादी कर दी जाती है। लड़का द्वारा लड़की को अपनाने के लिए पिता को दण्ड स्वरूप धन दौलत देना पड़ता है।

विटलाहा

यह एक तरह का समाजिक बहिष्कार है। संथाल जनजाति में इसे सबसे कठोर दण्ड माना जाता है। जब कोई दोषी व्यक्ति पारंपरिक नेतृत्व के फैसले को मानने से इनकार कर देता है और दण्ड देने का कोई दुसरा विकल्प नही रहता है तो दोषी व्यक्ति को विटलाहा कि सजा दी जाती है। इसके तहत पुरे क्षेत्र के लोग दिन, तारिख, समय और स्थान निश्चित कर बैठकी करते है। जुलूस कि शक्ल में दोषी व्यक्ति के घर जाते है और उसका चुल्हा तोड़ते है। पुरे परिवार को डराया धमकाया जाता है। इस तरह कि सजा आम तौर पर यौन अत्याचार या बलात्कार के मामलों मे दी जाती है।

उम्मीद है आपको मांझी परगना शासन व्यवस्था पर लिखी यह लेख अच्छी लगी होगी और कुछ जानकारी मिली होगी। फिर भी अगर कोई सवाल है तो बेझिझक कॉमेंट मे पुछे। आपकी सहयता करके खुशी मिलेगी। और अंत मे इस पोस्ट को शेयर करना बिल्कुल न भूले।

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2 Comments

  1. कभी गाँव मे छोटा मोटा विवाद होने पर मांझी सासन व्यवस्था को बताये बिना सीधा पुलिस प्रशासन को बुलाना इस सासन व्यवस्था में उचित है या नहीं

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